इजराइल और गल्फ के देशों ने किया अमेरिका का विरोध, Nato पर खतरा

इजराइल के अंदर चार महत्वपूर्ण खाड़ी देश मिलकर summit कर रहे हैं ये पूरे विश्व के लिए बहुत ही बड़ी घटना है। में होने वाली summit से पहले इजराइल ने ये कह दिया है कि ईरान केवल और केवल इजराइल के लिए समस्या नहीं है। यूक्रेन में शुरुआत हुई समस्या खाड़ी देशों के अंदर पहुँच गई है। अमेरिका के लिए decision लेना बड़ा मुश्किल होता जा रहा है। ईरान और युक्रेन दोनों ही democratic countries हैं। मगर सबको पता है कि अमेरिका केवल और केवल यूक्रेन के साथ है। ईरान के ऊपर बहुत सारे sanctions लगाए हैं।

कुछ ही दिन पहले के लिए अमेरिका से स्टेटमेंट आया था कि democratic countries को democratic के साथ होना चाहिए। इसीलिए अमेरिका के लिए स्थिति डामाडोल हो गई है। इस समय जो सबमिट चल रही है बहरेन, इजिप्ट, मोरोको और यूएई सभी के सभी बैठे हैं इसराइल के अंदर। पहले ये माना जा रहा था कि war जितना लंबा होगा पुतिन को नुकसान होगा मगर अब ये स्थिति आ गई है war के लंबा होने पर नेटो में कलह हो रही है। यूक्रेन के बिल्कुल नजदीक पोलैंड के अंदर आकर बाइडन बोलते हैं कि हम आपके साथ हैं आपकी freedom हमारी freedom है। अजीबोगरीब तरीके से उन्होंने इस स्वीकार कर लिया कि जो समय चल रहा है बहुत ही difficult है।

मगर पोलैंड के साथ में उनके relations बढ़ रहे हैं। जो लोग diplomacy और वर्ड politics समझते हैं उनको पता है कि हर स्टेटमेंट के पीछे एक और अर्थ छुपा हुआ होता है वो सामने आ गया नेटो कन्ट्रीज को अगर ये बताने की जरूरत पड़ती है कि हमारे बीच के अंदर जो relations हैं बढ़ रहे हैं इसका मतलब उनके relations ठीक नहीं चल रहे। इन सबके पीछे कई सारे कारण हैं।
पहला कारण ये है कि यूक्रेन के direct contact के अंदर जो countries आती हैं उन पे सबसे ज्यादा फर्क पड़ रहा है रशिया का।

जिस समय युद्ध हुआ था तीन मार्च को हंगरी ने ये बोला था कि जितने भी sanction रशिया के ऊपर लगाए जाएंगे हम उनके साथ हैं मगर ये बाद में पलट गए। तीन मार्च के छह ही दिन बाद में नौ मार्च को हंगरी ने बोल दिया कि हम किसी भी sanction में जिसके अंदर Russian energy involve है साथ नहीं देंगे। हंगरी के सबसे बड़े न्यूज़ agency में जो खबर छपती है इंटरनेशनल मीडिया से साफ हो जाती है दिखाता नहीं कोई। बिल्कुल clear cut हंगरी ने बोल दिया था कि किसी भी प्रकार से जो युद्ध का प्राइस है वो हमारे नागरिक pay नहीं करेंगे।

छह दिन के अंदर ही हंगरी ने अपना स्टैंड change कर लिया मगर इंटरनेशनल मीडिया ने उसको बाईस मार्च के बाद में स्वीकार किया। पहले तो इस बात को मान ही नहीं रहे थे किसी के सामने आने ही नहीं दे रहे थे मगर कब तक इस बात को आप छुपाएंगे। जब war शुरू हुआ तो युक्रेन ना इस तरफ जा सकता है ना इस तरफ।

इजराइल और गल्फ के देशों ने किया अमेरिका का विरोध, Nato पर खतरा
इजराइल और गल्फ के देशों ने किया अमेरिका का विरोध, Nato पर खतरा

ये जो red बॉर्डर है यहाँ पर ये नहीं जा सकते। तो युक्रेन का सबसे ज्यादा जो माइग्रेशन हुआ है पोलैंड के अंदर और हंगरी के अंदर हुआ है। यूरोपियन यूनियन के अंदर बहुत सारे देश हैं मगर जो देश युक्रेन के बिल्कुल नजदीक है वहां पर इतने रिफ्यूजी आ गए हैं। कि अब वहां पर समस्या उत्पन्न होने लगी है। युक्रेन के इस के अंदर जो countries आती है उनके अंदर सबसे ज्यादा समस्या है इमीग्रेशन की। दूसरी तरफ यूनाइटेड किंगडम, आयरलैंड, फ्रांस, पेन ये सब जो कन्ट्रीज है, फिलहाल इनके ऊपर वॉर का effect नहीं हो रहा और ये जो डिसेंट है इन कन्ट्रीज का इन
कंट्रीज के साथ में समय के साथ में वो बढ़ता ही जाएगा।

सबसे बड़ी समस्या तो इमिग्रेशन की है, refugees जो आ रहे हैं, उससे बड़ी समस्या ये है कि अगर रशिया नाराज हो गया तो सबसे पहले इनके ऊपर अटैक होगा बाकियों पर नहीं। यूक्रेन के राष्ट्रपति भी बहुत ज्यादा frustration निकाल रहे हैं, नेटो कंट्रीज पर क्योंकि ये इनको हेल्प नहीं कर रही, ये कह रहे हैं कि तुम्हारे पास में इतने सारे प्लेन हैं, इतने सारे टैंक हैं, जो धूल झाड़ रहे हैं, उनको हमारे को क्यों नहीं दे देते? असली स्थिति ये है, पोलैंड हंगरी जैसी नेटो कंट्रीज जो रशिया के बिल्कुल कांटेक्ट में आ जाएंगे, यूक्रेन के बाद वो किसी भी प्रकार से युद्ध नहीं चाहती.

अमेरिका का ये स्टेटस है कि पूरे वर्ल्ड के अंदर वो कैप्टन अमेरिका की तरीके से दिखाई दे. और वहां पर जो democracy है, वहां की जो public है, वो भी यही पसंद करती है, खबर उड़ा दी जाती है कि अमेरिका की तरफ से पोलैंड से बहुत सारे जट जाएंगे और वहां एयर बेस को use करेंगे। ये बात सुन के पोलैंड के हाथ-पाँव फूल जाते हैं। हाथों-हाथ ऐसा ट्वीट किया गया जो कभी countries नहीं करती। पोलैंड के प्राइम मिनिस्टर के चैंसलेरी से ये ट्वीट किया जाता है कि बिल्कुल फेक न्यूज़ है।

हम किसी भी प्रकार से अपने एयरजेट नहीं भेजेंगे। और ना ही हमारा कोई भी एयरपोर्ट use होगा। यूक्रेन के लिए रशिया के खिलाफ। अब यहाँ पर जग जाहिर हो गया कि जो नेटो कन्ट्रीज है वो सारी एकमत नहीं रखती। साथ ही में यूनाइटेड स्टेट्स की थोड़ी सी reputation के ऊपर फर्क पड़ा है। इसराइल के अंदर जो समिट हो रही है जिसमें गल्फ कंट्रीज पहुंची है वो भी यूएस के लिए कोई अच्छी खबर नहीं देने वाला।

सबसे अच्छी बात United States ने इस समय कर दी है कि ईरान के जो presidential guards हैं उनके ऊपर terrorist का tag हटा दिया है। इस बात को ले के इजराइल बहुत ज्यादा नाराज है मगर वो खुले तौर पर कुछ कह नहीं रहा। normally gulf और इजराइल के बीच में संधि कराने वाली summits होती है। मगर इस summit के अंदर दोनों एकजुट नजर आ रहे हैं। और वो ये कह रहे हैं कि ईरान के साथ में जो यूएस की nuclear डील हुई है, ये पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी खतरनाक है।

रशिया के साथ में nato countries को सामने करके अमेरिका का जो था वो बिल्कुल अब उसके पक्ष में नहीं जा रहा। जैसे-जैसे war खींच रहा है अमेरिका की समस्याएं बढ़ रही हैं। तेल, गैस यानी कि एनर्जी की crisis को सॉर्ट आउट करने के चक्कर में एक नया विवाद शुरू हो गया है और अमेरिका के विदेश मंत्री केवल और केवल हर किसी को पीस डाउन, काम डाउन करने के लिए गए हैं।

क्योंकि गल्फ कन्ट्रीज ने और इजराइल ने ये कह दिया है कि अगर हम यहाँ से disappointed हो के गए, तो हम अपने हिसाब से अपनी रक्षा करेंगे। अमेरिका के ऊपर dependent नहीं रहेंगे। यूक्रेन क्राइसिस शुरू होने से पहले कौन ये मानता था कि इजराइल और गल्फ कंट्रीज आपस में एक गुट अमेरिका पे प्रेशर डालेंगी।

और उनको ये बात कहेंगी कि ईरान के साथ में डील मत करो। पूरी situation के अंदर इंडिया की कोई खास एंट्री नहीं हुई है मगर यूक्रेन को पहले से पता था कि ये मामला केवल और केवल इंडिया सॉर्ट आउट कर सकता है। यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल के अंदर भारत का जो एक स्टेप था जो सोचा नहीं जा सकता था। उसके इतने लंबे consequences आएंगे किसी ने सोचा नहीं था।

आईओसी मीटिंग को इंडिया के खिलाफ में बुलाया गया था सबको पता है मगर ये भी सबने देखा कि एमिरेट्स, इजिप्ट और मोरो को इंडिया के पास आ रहे हैं और अब जा के ये भी हो गया है कि इजराइल के प्रधानमंत्री भी इंडिया के पास में आएंगे meeting करने के लिए इन सब का एक ही गुट है। कई सारे भविष्यवक्ताओं ने इंडिया के लिए भविष्यवाणियां की गई थी मगर भविष्यवाणियों को इंटरनेशनल politics में हम नहीं मानते। फिर भी जो हो रहा है वो बिल्कुल वैसा ही हो रहा है।

यूएस इस समय लगा है nato countries के अंदर किस प्रकार से अपना confidence बना है साथ ही के अंदर gulf उनके हाथ से ना निकल जाए। रशिया ने एक war घोषित कर रखा है जो कि अब दूसरी countries के लिए भी समस्या उत्पन्न कर रहा है जिसको रोकने की काबिलियत केवल और केवल के ही कंट्री में बची है। वॉर जितना लंबा होगा खतरनाक होगा जल्दी ही खत्म होना चाहिए, भारत की भूमिका इसमें रहनी चाहिए, नमस्कार,

धन्यवाद, जय हिंद।

Russia war againts ukrain israil and gulf country

P.S Kashyap

मेरा नाम पंकज कुमार कश्यप है. मैं पेशे से एक मैकेनिकल इंजिनियर हूँ. और साथ में अपने को नॉलेज को शेयर करने के लिए 2016 से ब्लॉग्गिंग और youtube पर सक्रिय हूँ.
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